गीतकार
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श्रीपाद कृष्ण (तात्यासाहेब) कोल्हटकर
उगिच का कांता
Ugich Ka Kanta
कठिण कठिण कठिण किती
Kathin Kathin Kathin Kiti
प्रेमा तिच्या उपमा नोहे
Prema Tichya Upama Nohe
बहु असोत सुंदर संपन्न
Bahu Asot Sundar Sampanna
सकल चराचरि या
Sakal Charachari Ya
हे प्रभो विभो अगाध किती
He Prabho Vibha Agadha Kiti