| घेई छंद मकरंद
प्रिय हा मिलिंद मधुसेवनानंद स्वच्छंद हा धुंद मिटता कमलदल होई बंदी भृंग तरि सोडिना ध्यास, गुंजनात दंग बिसतंतू मृदु होति जणु व्रजबंध स्वरब्रम्ह आनंद ! स्वर हो सुगंध |
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| गीत | - | पुरुषोत्तम दारव्हेकर | ||
| संगीत | - | पं. जितेंद्र अभिषेकी | ||
| स्वर | - | पं. वसंतराव देशपांडे | ||
| नाटक | - | कट्यार काळजात घुसली (१९६७) | ||
| राग | - | धानी (पं. वसंतराव देशपांडे)(नादवेध) | ||
| सलगवरली (पं. जितेंद्र अभिषेकी) | ||||
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