| अंग अंग तव
अनंग खुलवि
मदन-मंजिरी
देवदूत याचितात सुखद-संग माधुरी मंद मंद हसित-लसित वदन प्रणयरंग सदन रूपरंग बहर तुझा कहर करी अंतरी तव यौवन रंगदार चाल तुझी डौलदार जादुभरे नैनबाण हरिति प्राण सुंदरी |
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| गीत | - | विद्याधर गोखले | ||
| संगीत | - | पं. राम मराठे, प्रभाकर भालेकर | ||
| स्वर | - | सुमन माटे | ||
| नाटक | - | मदनाची मंजिरी (१९६५) | ||
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