| आली प्रणय-चंद्रिका
करी सुंदरी, मदनाची मंजिरी जशी झळकते चटकचांदणी कामिनी राजहंसगामिनी ! नवती नवनीताच्या परी मुलायम माषुक मख्खन-परी ! जिचिया उरोज-बहरावरी कंचुकी तटतटली भरजरी ! रसीली नयनांची चातुरी कोवळी अधरांची माधुरी चेतवी मदनरंग-दीपिका दिलाच्या रंग-महालांतरी ! |
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| गीत | - | विद्याधर गोखले | ||
| संगीत | - | पं. राम मराठे, प्रभाकर भालेकर | ||
| स्वर | - | ??? | ||
| नाटक | - | मदनाची मंजिरी (१९६५) | ||
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