| एवढे तरी करून
जा हा वसंत आवरून जा ही न रीत मोहरायची आसवांत मोहरून जा तारकांपल्याड जायचे ह्या नभास विस्मरून जा ये उचंबळुन अंतरी सावकाश ओसरून जा ह्या हवेत चंद्रगारवा .. तू पहाट पांघरून जा ये सख्या, उदास मी उभी आसमंत मंतरून जा |
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| गीत | - | सुरेश भट | ||
| संगीत | - | यशवंत देव | ||
| स्वर | - | पद्मजा फेणाणी-जोगळेकर | ||
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