| आला जो मज प्रेमें
वराया । कां न करी सुशिला निज जाया ॥ कुमुदमोहें पंकात दिसला । करी मग विमल शशि तो कमला ॥ |
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| गीत | - | कृष्णाजी प्रभाकर खाडिलकर | ||
| संगीत | - | गंधर्व नाटक मंडळी, हिराबाई बडोदेकर | ||
| स्वर | - | बालगंधर्व | ||
| नाटक | - | संगीत विद्याहरण (१९१३) | ||
| राग | - | सिंधुरा (मूळ संहिता) | ||
| ताल | - | दीपचंदी | ||
| चाल | - | ’कान्हा ये सखि नंद महलमे’ | ||
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