| अशी नटे ही
चारुता । सतनु काय विसरवि स्मृति । वरित सार्थता ॥ नयनि तरलता, नाचत खेळत । विभवि नव दिसत हास्य लयास ॥ |
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| गीत | - | नारायण विनायक कुळकर्णी | ||
| संगीत | - | मा. कृष्णराव, विनायकबुवा पटवर्धन | ||
| स्वर | - | ??? | ||
| नाटक | - | संत कान्होपात्रा (१९३१) | ||
| राग | - | तिलककामोद (मूळ संहिता) | ||
| ताल | - | एकताल | ||
| चाल | - | ’मनमे मोहन विराजे’ | ||
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