| कशि नाचे छमाछ्म्,
मत्त मयुरी
। दरि दरी झंकारित करि ही मदनधनूची दोरी ॥ निर्झर खळखळ आज घुमवि पखवाज करित हा वनवात मुरलिची साथ वदत महेश्वर, "अशि न पाहिली, नर्तन कुशल किशोरी" ॥ |
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| गीत | - | विद्याधर गोखले | ||
| संगीत | - | वसंत देसाई | ||
| स्वर | - | पं. राम मराठे | ||
| नाटक | - | जय जय गौरीशंकर (१९६६) | ||
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