| अजुनि खुळा
हा नाद पुरेसा
कैसा होइना
। नाटक झालें जन्माचें मनिं कां हो येइना ॥ व्यसनें जडली नवीं नवीं कुणि तिकडे पाहिना । नांव बुडविलें वडिलांचे कीर्ति जगीं माइना ॥ |
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| गीत | - | गोविंद बल्ल्लाळ देवल | ||
| संगीत | - | गोविंद बल्ल्लाळ देवल | ||
| स्वर | - | बालगंधर्व | ||
| नाटक | - | संगीत शारदा (१८९९) | ||
| राग | - | झिंझोटी (मूळ संहिता) | ||
| ताल | - | त्रिताल | ||
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