| काय वधिन मी
ती सुमती ।
नवयुवती अबला साश्रुलोचना । धरुनि कुरलकुंतला लता या हाती ॥ कोमल कुसुमित लता कधी ही । लववुनि कुसुमे खुडिली नाहीं । आजवरी तीं ॥ |
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| गीत | - | गोविंद बल्ल्लाळ देवल | ||
| संगीत | - | गोविंद बल्ल्लाळ देवल | ||
| स्वर | - | रामदास कामत | ||
| नाटक | - | संगीत मच्छकटिक (१८८९) | ||
| राग | - | आसावरी (मूळ संहिता) | ||
| ताल | - | त्रिताल | ||
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