| अंगणी पारिजात
फुलला । बहर तयाला काय माझिया प्रीतीचा आला ॥ धुंद मधुर हा गंध पसरला गमले मजला मुकुंद हसला सहवासातुन मदिय मनाचा कणकण मोहरला ! |
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| गीत | - | विद्याधर गोखले | ||
| संगीत | - | छोटा गंधर्व | ||
| स्वर | - | जयमाला शिलेदार | ||
| नाटक | - | सुवर्णतुला (१९६०) | ||
| राग | - | बिहाग (संगीत यात्रा) | ||
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