| कैवल्याच्या
चांदण्याला
भुकेला चकोर चंद्र व्हा हो पांडुरंगा, मन करा थोर बालवयी खेळी रमलो, तारुण्य नासले वृद्धपणी देवा आता दिसे पैलतीर जन्म-मरण नको आता, नको येरझार नको ऐहिकाचा नाथा व्यर्थ बडिवार चराचरापार न्या हो जाहला उशीर पांडुरंग पांडुरंग मन करा थोर |
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| गीत | - | अशोकजी परांजपे | ||
| संगीत | - | पं. जितेंद्र अभिषेकी | ||
| स्वर | - | पं. जितेंद्र अभिषेकी | ||
| नाटक | - | गोरा कुंभार (१९७८) | ||
| राग | - | भैरवी (नादवेध) | ||
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