| देवाघरचे ज्ञात
कुणाला विचित्र
नेमानेम ? कुणी रखडती धुळीत आणिक कुणास लाभे हेम मी निष्कांचन, निर्धन साधक वैराग्याचा एक उपासक हिमालयाचा मी तो यात्रिक मनात माझ्या का उपजावे संसाराचे प्रेम ? |
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| गीत | - | वसंत कानेटकर | ||
| संगीत | - | पं. जितेन्द्र अभिषेकी | ||
| स्वर | - | रामदास कामत | ||
| नाटक | - | मत्स्यगंधा (१९६४) | ||
| राग | - | यमन (नादवेध) | ||
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