| कबिराचे विणतो
शेले, कौसल्येचा
राम भाबड्या या भक्तासाठी, देव करी काम ! एक एकतारी हाती, भक्त गाई गीत एक एक धागा जोडी, जानकिचा नाथ राजा घनःश्याम ! दास रामनामी रंगे, राम होइ दास एक एक धागा गुंते, रूप ये पटास राजा घनःश्याम ! विणुन सर्व झाला शेला, पूर्ण होइ काम ठायि ठायि शेल्यावरती, दिसे रामनाम राजा घनःश्याम ! हळु हळु उघडी डोळे, पाहि तो कबीर विणूनिया शेला गेला, सखा रघुवीर कुठे म्हणे राम ? |
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| गीत | - | ग. दि. माडगूळकर | ||
| संगीत | - | पु. ल. देशपांडे | ||
| स्वर | - | माणिक वर्मा | ||
| चित्रपट | - | देव पावला (१९५०) | ||
| राग | - | यमन (नादवेध) | ||
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