| अरे खोप्यामधी
खोपा सुगरणीचा चांगला देखा पिलासाठी तिनं झोका झाडाला टांगला पिलं निजली खोप्यात जसा झुलता बंगला तिचा पिलामधी जीव जीव झाडाले टांगला खोपा इनला इनला जसा गिलक्याचा कोसा पाखरांची कारागिरी जरा देख रे मानसा तिची उलूशीच चोच तेच दात, तेच ओठ तुले देले रे देवानं दोन हात दहा बोटं |
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| रचना | - | संत बहिणाबाई चौधरी | ||
| संगीत | - | वसंत पवार | ||
| स्वर | - | सुमन कल्याणपूर | ||
| चित्रपट | - | मानिनी (१९६१) | ||
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