| उठि श्रीरामा,
पहाट झाली;
पूर्व दिशा
उमलली उभी घेउनी कलश दुधाचा, कौसल्या माउली होमगृही या ऋषीमुनींचे सामवेद रंगले गोशाळेतुन कालवडीचे, दुग्धपान संपले मंदिरातले भाट चालले, गाउन भूपाळी काल दर्पणी चंद्र दावुनी सुमंत गेले गृहा त्याच दर्पणी आज राघवा, सूर्योदय हा पहा वसिष्ठ मुनिवर घेउन गेले पुजापात्र राउळी राजमंदरी दासी आल्या रत्नदीप विझविण्या ऊठ रजसा, पूर्वदिशेचा स्वर्ण-यज्ञ पाहण्या चराचराला जिंकुन घेण्या अरुणप्रभा उजळली |
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| गीत | - | रवींद्र भट | ||
| संगीत | - | सुधीर फडके | ||
| स्वर | - | आशा भोसले | ||
| चित्रपट | - | ते माझे घर (१९६०) | ||
| राग | - | भूप, देसकार (नादवेध) | ||
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