| हरीभोवती नित्य
नाचतो भक्तांचा मेळा हरी भक्तिचा भुकेला पहाटसमयी जात्यावरती दळू लागला जनीसंगती ओवी गाउनि हा जगजेठी भक्तासवे रंगला घास घेई नारायणा नामदेव तो हट्ट सोडिना श्रीपतिराणा त्रिभुवनाचा भक्तासवे जेवला कबिराघरचे विणले शेले भक्त-प्रभू ते एकचि झाले भक्तासवे त्या प्रभू नाचले घेउनि भक्ति-ध्वजा |
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| गीत | - | योगेश्वर अभ्यंकर | ||
| संगीत | - | गोविंद पोवळे | ||
| स्वर | - | माणिक वर्मा | ||
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