| या मुरलीने
कौतुक केले गोकुळाला वेड लाविले वेड लाविले श्रीकृष्णाला हिजविण क्षणही न सुचे त्याला सतत आपुल्या अधरी धरिले हिच्या मधुर मंजुळ सुरांतुन अमरपुरीचे डुलले नंदन यमुनेचे जळ चाल विसरले भुलल्या धेनु, भुलल्या हरिणी चकित थबकले देवहि गगनी मधुर सुरांनी त्रिभुवन भुलले अधरसुधा प्राशून हरीची पावन झाली तनु मुरलीची "भाग्यवती मी" मुरली बोले |
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| गीत | - | सुधांशु | ||
| संगीत | - | दशरथ पुजारी | ||
| स्वर | - | माणिक वर्मा | ||
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