| पैंजण हरिची
वाजली गाईगुरं हंबरली कमलाहुनि जे मोहक डोळे श्यामल कांती अल्लड चाळे झरझर झरझर नयनांपुढुनी, प्रतिमा ती सरसरली गोविंदाचा छंद जिवाला चराचराला व्यापुनि उरला ध्यानिमनीही स्वप्नी माझ्या, नव आशा फुलली हीच पाऊले माझ्या हरिची, खूण असे ती हंबरण्याची गाईगुरे ही आनंदाने, नाचत बागडली |
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| गीत | - | योगेश्वर अभ्यंकर | ||
| संगीत | - | गोविंद पोवळे | ||
| स्वर | - | माणिक वर्मा | ||
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