| प्रितीच्या
चांदराती घेऊनी
हात हाती जोडू अमोल नाती, ये ना, ये प्रिये ! फुलला हा कुंज सारा, हसली पाने फुले रुसवा आता कशाला, अधरी प्रिती फुले हासते.... चांदणे ! सरला आता दुरावा, मिटती का लोचने सखये या मिलनाला, नुरले काही उणे हात दे, साथ दे ! |
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| गीत | - | शांताराम नांदगावकर | ||
| संगीत | - | अनिल, अरुण | ||
| स्वर | - | हेमंतकुमार | ||
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