| एक सूर एक ताल,
एक गाऊ विजयगान जय जवान, जय किसान ! जय जवान, जय किसान, जय जय ! अखिल देश पाठीशी ’जवान’ व्हा रणी चला किसान होऊनी कसा भूमी सस्य शामला यौवनास योग्य रे शौर्य आणि स्वाभिमान जय जवान, जय किसान ! शत्रू मित्र जाणुनी सावधान सर्वदा आपल्या श्रमे करू प्रसन्न देवी अन्नदा उभ्या जगात आपुली सदैव उंच ताठ मान जय जवान, जय किसान ! अजिंक्य सैन्य आमचे, गाजवी पराक्रमा भूमिदास दाखवी निर्मितीत विक्रमा स्वतंत्र हिंद देश हा, स्वतंत्र सिंधू आसमान जय जवान, जय किसान ! |
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| गीत | - | ग. दि. माडगूळकर | ||
| संगीत | - | |||
| स्वर | - | |||
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