| दान दिल्याने
ज्ञान वाढते, त्या ज्ञानाचे मंदिर हे सत्य शिवाहुन सुंदर हे इथे मोल ना दामाचे, मोती होतिल घामाचे सरस्वतीच्या प्रेमाचे, प्रतीक रम्य शुभंकर हे चिरा-चिरा हा घडवावा, कळस कीर्तीचा चढवावा अज्ञानी तो पढवावा, थेंब अम्ही नच सागर हे त्यागाला या नाव नसे, पुण्यवान हा देश असे कल्पतरू हा उभा दिसे, त्या छायेतील मंदिर हे |
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| गीत | - | जगदीश खेबुडकर | ||
| संगीत | - | सुधीर फडके | ||
| स्वर | - | सुधीर फडके | ||
| चित्रपट | - | जोतिबाचा नवस | ||
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