| पाखरा जा दूर
देशी सांग माझा निरोप माझ्या साजणा चैत्राचे चांदणे मला आज बोलावे बोलण्यात त्याचिया भान पार मालवे मी आज एकली साथ ना कुणाची म्हणूनिच लाडक्या जा सांग ना, पाखरा जा मैनेचे बोलणे मला आज आठवे आठवात होई ग मन फार हळवे प्रित आज हसली साथ ना मनाची म्हणूनिच लाडक्या जा सांग ना, पाखरा जा |
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| गीत | - | अशोकजी परांजपे | ||
| संगीत | - | अशोक पत्की | ||
| स्वर | - | सुमन कल्याणपूर | ||
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