| नाते जुळले
मनाशी मनाचे फुले गीत ओठी, अनोख्या सुरांचे कशी मूर्त केली खुळ्या लोचनांनी तुझ्या अंतरीची अबोली कहाणी ? ही अबोली कहाणी कसे फूल झाले, दिवाण्या कळीचे ? जुळे ही मिठी बावऱ्या लोचनांची जशी भेट होते नदी-सागराची नदी-सागराची मनी नाचती हे, रंग अमृताचे उरो ध्यास भवती नुरो भान काही सुगंधात न्हाल्या दिशा धुंद दाही या दिशा धुंद दाही क्षणी रूप दिसले, मला नंदनाचे |
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| गीत | - | वंदना विटणकर | ||
| संगीत | - | डी. एस्. रुबेन | ||
| स्वर | - | जयवंत कुलकर्णी | ||
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