| लवलव करी पात,
डोळं नाही थाऱ्याला एक टक पाहु कसं, लुक लूक ताऱ्याला चवचव गेली सारी, जोर नाही वाऱ्याला सुटं सूटं झालं मन, धरू कसं पाऱ्याला कुणी कुणी नाही आलं, फडफड गं राव्याची रूणझूण हवा का ही, गाय उभी दाव्याची तटतट करी चोळी, तुटतुट गाठीची उंबऱ्याशी जागी आहे, पारूबाई साठीची |
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| गीत | - | आरती प्रभू | ||
| संगीत | - | पं. हृदयनाथ मंगेशकर | ||
| स्वर | - | पद्मजा फेणाणी-जोगळेकर | ||
| चित्रपट | - | निवडूंग (१९८९) | ||
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