| छम् छम् छम्
..... छम्
छम् छम् छडी लागे छ्मछ्म, विद्या येई घमघम छम् छम् छम् ..... छम् छम् छम् मोठ्या मोठ्या मिश्या, डोळे एवढे एवढे लाल दंतोजींचा पत्ता नाही, खप्पड दोन्ही गाल शाळेमधल्या पोरांना हा वाटे दुसरा यम छम् छम् छम् तंबाखूच्या पिचकाऱ्यांनी भिंती झाल्या घाण पचापचा शिव्या देई खाता खाता पान "मोऱ्या मूर्खा- !", "गोप्या गद्ध्या !", देती सर्वा दम छम् छम् छम् तोंडे फिरवा, पुसती गिरवा, बघु नका कोणी हसू नका, रडू नका, बोलु नका कोणी म्हणा सारे एकदम, ओ नमा सिद्ध्म् छम् छम् छम् |
||||
| गीत | - | वसंत बापट | ||
| संगीत | - | वसंत देसाई | ||
| स्वर | - | पं. हृदयनाथ मंगेशकर | ||
| चित्रपट | - | श्यामची आई (१९५३) | ||
|
||||