| गोड गोजरी,
लाज लाजरी ताईच
होणार नवरी फुलाफुलांच्या बांधुन माळा मंडप घाला ग दारी करकमलाच्या देठावरती चुडा पाचुचा वाजे हळदीहुनही पिवळा बाई रंग तुला तो साजे अंगणी फुगडी नाचे, रूप पाहुनी तुझे, साद घाली मणी मंगळ सरी भरजरीचा शालू नेसुनी, जाई, ताई आमुची गौरी लग्न-मंडपी तिच्या समोरी, उभी तिकडची स्वारी अंतरपाट धरी, शिवा पार्वती वरी, लाडकी ही जाई ताई दुरी |
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| गीत | - | पी. सावळाराम | ||
| संगीत | - | पं. हृदयनाथ मंगेशकर | ||
| स्वर | - | उषा मंगेशकर, कृष्णा कल्ले | ||
| चित्रपट | - | धर्मकन्या (१९६८) | ||
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