| आरंभी वंदीन
अयोध्येचा राजा
। भक्ताचीया काजा पावत असे ॥१॥ पावत असे महासंकटी निर्वाणी । रामनाम वाणी उच्चारीत ॥२॥ उच्चारिता राम होय पाप चर । पुण्याचा निश्चय पुण्यभूमी ॥३॥ पुण्यभूमी पुण्यवंतासीं आठवे । पापीयानाठवे काही केल्या ॥४॥ काही केल्या तुझे मन पालटेना । दास म्हणे जन सावधान ॥५॥ |
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| रचना | - | समर्थ रामदास | ||
| संगीत | - | राम फाटक | ||
| स्वर | - | पं. भीमसेन जोशी | ||
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