| एकतत्व नाम
दृढ धरीं मना
। हरीसि करुणा येईल तूझी ॥१॥ तें नाम सोपें रें राम कृष्ण गोविंद । वाचेसीं सद्गद जपें आधीं ॥२॥ नामापरतें तत्व नाहीं रे अन्यथा, वायां आणिका पंथा जाशी झणें ॥३॥ ज्ञानदेवा मौन जप-माळ अंतरीं, धरोनि श्रीहरि जपे सदा ॥४॥ |
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| रचना | - | संत ज्ञानेश्वर | ||
| संगीत | - | केशवराव भोळे | ||
| स्वर | - | यशवंत | ||
| चित्रपट | - | संत ज्ञानेश्वर (१९४०) | ||
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