| नामाचा गजर
गर्जे भीमातीर
। महीमा साजे थोर तुज एका ॥१॥ ऋद्धी-सिद्धी दासी अंगण झाडीती । उच्छिष्ठे काढीती मुक्ती चारी ॥२॥ चारी वेद भाट होऊनी गर्जती । सनकादिक गाती कीर्ती तुझी ॥३॥ सुरवरांचे भार अंगणी लोळती । चरणरज क्षिती शिव वंदी ॥४॥ नामा म्हणे देव ऐसा हो कृपाळू । करितो सांभाळु अनाथांचा ॥५॥ |
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| रचना | - | संत नामदेव | ||
| संगीत | - | राम फाटक | ||
| स्वर | - | पं. भीमसेन जोशी | ||
| राग | - | यमन (नादवेध) | ||
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