| दूर आर्त सांग
कुणी छेडली
आसावरी पारिजातकुसुमे ही उधळिली मनावरी एकाकीपण सरले मी माझी नच उरले भान असे हरले अन् मी झाले बावरी यमुनेचे हे पाणी चकित होय मजवाणी कानांनी प्राणांनी प्रशियली माधुरी कुठुनी हे येति सूर ? लावितात मज हुरहुर फडफडतो तडफडतो प्राणविहग पंजरी मी मजला विसरावे बुडुनि सुरांतच जावे बासरी न दूर सखे, ती माझ्या अंतरी |
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| गीत | - | मंगेश पाडगावकर | ||
| संगीत | - | यशवंत देव | ||
| स्वर | - | मधुबाला जव्हेरी | ||
| राग | - | आसावरी (नादवेध) | ||
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