| वारा गाई गाणे
प्रीतीचे तराणे धुंद आज वेली, धुंद फुल पाने रंग हे नवे, गंध हे नवे स्वप्न लोचनी वाटते हवे हा निसर्ग भासे विश्वरूप लेणे या निळ्या नभी मेघ सावळे कल्पनेस मी पंख लाविले झेलते पीसावरी हे सतेज सोने आज वेड हे कुणी लाविले अंतराळी का पडती पाऊले कशी सोडवू मी सुखाचे उखाणे |
||||
| गीत | - | जगदीश खेबुडकर | ||
| संगीत | - | पं. हृदयनाथ मंगेशकर | ||
| स्वर | - | लता मंगेशकर | ||
| चित्रपट | - | संसार (१९८०) | ||
|
||||