सुरत पियाकी न्‌ छिन्‌ बिसुराये
हर हरदम उनकी याद आये

नैनन और न को समाये
तरपत हूं बिलखत रैन निभाये
अखियाँ निर असुवन झर लाये

साजन बिन मोहे कछुना सुहावे
बिगरी को मेरे कौना बनावे
हसनरंग असु जी बहलावे
 
 
गीत - पुरुषोत्तम दारव्हेकर
संगीत - पं. जितेंद्र अभिषेकी
स्वर - पं. वसंतराव देशपांडे
नाटक - कट्यार काळजात घुसली (१९६७)
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