ये मौसम है रंगीन, रंगीन शाम
सनम्‌ने दिया जो मुहोब्बतसे जाम

जादूभरी लुत्फे मय्‌ क्या कहूँ ?
रसिली नजर का असर क्या कहूँ ?

हमें आसमॉंसे है आया पयाम
खुदा मेहरबॉं हैं, न सागरको थाम

ओ मीनाकुमारी ! तुझे है कसम
पिलाके भुला दे ये दुनियाके गम

बहुत प्यास है, और जवानी है कम
जुबॉं पे है दिलदार तेराहि नाम

सफरमे न आयेगा ऐसा मुकाम
करते फरिश्ते है झुकके सलाम
 
 
गीत - विद्याधर गोखले
संगीत - पं. राम मराठे, प्रभाकर भालेकर
स्वर - मधुवंती दांडेकर
नाटक - मदनाची मंजिरी (१९६५)
For the printable version of this song, click here.