ये मौसम है
रंगीन, रंगीन
शाम
सनम्ने दिया
जो मुहोब्बतसे
जाम
जादूभरी लुत्फे
मय् क्या कहूँ
?
रसिली नजर का
असर क्या कहूँ
?
हमें आसमॉंसे
है आया पयाम
खुदा मेहरबॉं
हैं, न सागरको
थाम
ओ मीनाकुमारी
! तुझे है कसम
पिलाके भुला
दे ये दुनियाके
गम
बहुत प्यास
है, और जवानी
है कम
जुबॉं पे है
दिलदार तेराहि
नाम
सफरमे न आयेगा
ऐसा मुकाम
करते फरिश्ते
है झुकके सलाम
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