रागिणी-मुखचंद्रमा
उजळि ह्रुदयी पूर्णिमा ॥
कोपता खुलतो कसा
वदन-शशिचा लालिमा ॥
रूप बघुनी लज्जिता
होति पूर्वा-पश्चिमा ॥
गीत
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विद्याधर गोखले
संगीत
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छोटा गंधर्व
स्वर
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प्रसाद सावकार
नाटक
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सुवर्णतुला (१९६०)
राग
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नारायणी
(संगीत यात्रा)