माता दिसली समरी विहरत, नेत सकल नरवीर रणासि ॥

मस्तकमाला गुंफित कालमहेश्वर पतिसेवेसि ॥

शिकवित भक्ता रणलीला जणु भीषणयुद्धकलेसि ॥
 
 
गीत - कृष्णाजी प्रभाकर खाडिलकर
संगीत - गोविंदराव टेंबे
स्वर - छोटा गंधर्व
नाटक - संगीत मानापमान (१९११)
राग - सिंधुरा (मूळ संहिता)
ताल - त्रिवट
चाल - ’आयेरी सन गोपी बन बन’
For the printable version of this song, click here.