गुन-सागर गंभीर दयामय
श्री गुरुदेव महान् !
सूर-ताल-लय-तान-गान के
किमयागार सुजान !
अनुशासन-पालनमें मन जो
उनका शैल-समान !
वही भरा है प्रेमभावसें
कोमल फूल-समान !
गीत
-
विद्याधर गोखले
संगीत
-
नीळकंठ अभ्यंकर
स्वर
-
???
नाटक
-
संगीत स्वरसम्राज्ञी (१९७२)