’सोहम’ हर डमरू बाजे ।

उसके सुर तालों के सुखकारक झुले पर
झूम रहे सरिता सर भुवनत्रय साजे ॥

डमरू ॐकार नाद, परमेसर का प्रसाद
उसके ही महिमासे गिरीकंदर गाजे ॥
 
 
गीत - विद्याधर गोखले
संगीत - पं. राम मराठे
स्वर - ज्योत्सना मोहिले
नाटक - मंदारमाला
राग - तोडी (नादवेध)
ताल - एकताल
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