स्वार्थी पसारा सारा जगि
स्वार्थी पसारा सारा जगि या ।
रवि चंद्र तारा ।
उडति त्या अमरा ॥
घनदाट अंधार पसरे निराशा ।
झुंजार वारा न जीवा निवारा ॥
रवि चंद्र तारा ।
उडति त्या अमरा ॥
घनदाट अंधार पसरे निराशा ।
झुंजार वारा न जीवा निवारा ॥
| गीत | - | यशवंत नारायण टिपणीस |
| संगीत | - | वझेबुवा |
| स्वर | - | प्रभाकर कारेकर |
| नाटक | - | शिक्काकट्यार (१९२७) |


















