गा रे कोकिळा गा
भूलोकीच्या गंधर्वा तू, अमृत संगीत गा
गा रे कोकिळा गा
सप्तसुरांचा स्वर्ग उभारुन
चराचरांला दे संजीवन
अक्षय फुलवित हे नंदनवन पर्णफुलातुन गा
कुहुकुहु बोलत मधुर गायनी
मोहित होता सारी अवनी
कुसुम-कोमला ही वनरणी नाचत थयथय गा
मन्मथ मनीचा इंद्रधनूला
शर पंचम तो लावुनी आला
प्रीत भेटता अनुरागाला मीलन होऊन गा
गा रे कोकिळा गा
सप्तसुरांचा स्वर्ग उभारुन
चराचरांला दे संजीवन
अक्षय फुलवित हे नंदनवन पर्णफुलातुन गा
कुहुकुहु बोलत मधुर गायनी
मोहित होता सारी अवनी
कुसुम-कोमला ही वनरणी नाचत थयथय गा
मन्मथ मनीचा इंद्रधनूला
शर पंचम तो लावुनी आला
प्रीत भेटता अनुरागाला मीलन होऊन गा
| गीत | - | पी. सावळाराम |
| संगीत | - | वसंत प्रभू |
| स्वर | - | आशा भोसले |
| चित्रपट | - | बायकोचा भाऊ (१९६२) |
| राग | - | केदार, हमीर |



















