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सावन घन गरजे बजाये

सावन घन गरजे बजाये
मधुर मधुर 'मल्हार' !
चमचम नाचे उसकी सजनी
छेल छबिली नार.. !

इंद्र-धनुषका मोर-मुकुट सिर
सावन-घन घन-शाम चढायें
गोरी गोरी बिजली गोपी
अपना सुंदर रूप दिखायें

शहनाई बन-पवन बजायें
करें मयूर पुकार !
हरियाला सावन मन-भावन
बरसे अमृत-धार !