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तारे नहीं ये तो रात को

तारे नहीं ये तो रात को आतिश भरे मोरे आह नें ।
है लिख दिया आसमां पर तेरे सितम का माजरा ॥

ओ गुलबदन जादुनयन, फुलों से नाजुक तन तेरा ।
जालीम तेरे नयनों ने क्यों घायल किया जियरा मोरा ॥

कभि कह के कुछ पछताये हम, कभि रह के चुप पछताये हम ।
पर इक हि नतीजा ये हुवा- उलजहन से मेरा दिल गिरा ॥

तुझे क्या खबर है ओ बेवफा, आँखों कि हो तुम रोशनी ।
लग जा गले को नाजनीं, ये दिल भी रोशन कर जरा ॥
गीत- विद्याधर गोखले
संगीत - पं. राम मराठे
स्वर - प्रसाद सावकार
नाटक- मंदारमाला
राग- मिश्र खमाज
ताल-रूपक
गीत प्रकार - नाट्यगीत