तुमबिन मेरी कोन खबर
तुमबिन मेरी कोन खबर ले । गोवर्धन गिरिधारी रे
मोरमुकुट पीताम्बर शोभे । कुंडल की गत न्यारी रे
खडी सभा मो द्रौपदी ठाडी । राखो लाज हमारी
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमल बलहारी रे
मोरमुकुट पीताम्बर शोभे । कुंडल की गत न्यारी रे
खडी सभा मो द्रौपदी ठाडी । राखो लाज हमारी
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमल बलहारी रे
| गीत | - | संत मीराबाई |
| संगीत | - | मास्टर कृष्णराव |
| स्वर | - | बालगंधर्व |
| नाटक | - | अमृतसिद्धी |
| राग / आधार राग | - | पिलू |
| ताल | - | कव्वाली, भजन |
| गीत प्रकार | - | नाट्यसंगीत, हे श्यामसुंदर |
| नागर | - | आचार्य पण्डित शुभ दर्शन, वाराणसी के अनुसार 'नागर' संस्कृत शब्द का अर्थ- नगरे भवः । अर्थात् नगर में रहने वाले किन्तु यहाँ पर तात्पर्य है प्रत्येक प्राणी के हृदय रूपी नगर में निवास करने वाले (परमात्मा)। 'मीरा के प्रभु गिरधर नागर' में यही भाव प्रकट होता है । |
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बालगंधर्व