अजि मी ब्रह्म पाहिले
अजि मी ब्रह्म पाहिले
अगणित सुरगण वर्णिती ज्यासी
कटिकर नटसम चरण विटेवरी, उभे राहिले
एकनाथाच्या भक्तीसाठी, धावत आला तो जगजेठी
खांदी कावड आवड मोठी, पाणी वाहिले
चोख्यासंगे ढोरे ओढिता, शिणला नाही तो तत्त्वता
जनीसंगे दळिता कांडिता, गाणे गाईले
दामाजीची रसीद पटवली, कान्होपात्रा ती उद्धरिली
अमृतराय ह्मणे ऐसी माउली, संकटा वारिले
अगणित सुरगण वर्णिती ज्यासी
कटिकर नटसम चरण विटेवरी, उभे राहिले
एकनाथाच्या भक्तीसाठी, धावत आला तो जगजेठी
खांदी कावड आवड मोठी, पाणी वाहिले
चोख्यासंगे ढोरे ओढिता, शिणला नाही तो तत्त्वता
जनीसंगे दळिता कांडिता, गाणे गाईले
दामाजीची रसीद पटवली, कान्होपात्रा ती उद्धरिली
अमृतराय ह्मणे ऐसी माउली, संकटा वारिले
| गीत | - | संत अमृतराय महाराज |
| संगीत | - | श्रीनिवास खळे |
| स्वर | - | आशा भोसले |
| राग / आधार राग | - | जयजयवंती |
| गीत प्रकार | - | संतवाणी, विठ्ठल विठ्ठल |
| कटि | - | कंबर. |
| कांडणे | - | कुटणे, सडणे. |
| कावड | - | जड पदार्थ नेण्यासाठी आडव्या बांबूच्या दोन टोकांस दोन दोर्या बांधून त्याला ओझी अडकवण्याची केलेली व्यवस्था. |
| जगजेठी | - | जगतात ज्येष्ठ असा तो, परमेश्वर. |
| ढोर | - | गाय, म्हैस, पशू. |
| तत्त्वता | - | खरोखर. |
| वारणे | - | दूर करणे / हाकणे. |
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आशा भोसले