A Non-Profit Non-Commercial Public Service Initiative by Alka Vibhas   
बासरी ही भान हरी

बासरी ही भान हरी
नादवि मनि मधु सुखलहरी

धुंद हृदय करि मुरलीचा
छंद सदा सुखकारी
सेविति अवघ्या ब्रह्मानंदा
गोकुळच्या नरनारी

मनमोही सखि, हा श्रीहरी
नाचवि, भुलवि मुरारी
फिटली अभिलाषा संसारी
मिटली चिंता सारी

त्रिभुवनसुंदर कान्हा नटवर
गोवर्धन गिरिधारी
लीला दावी जगा तारी
मंगल कुंजविहारी
गीत- स. अ. शुक्ल
संगीत -
स्वर - संजीवनी मराठे
गीत प्रकार - हे श्यामसुंदर

 

Random song suggestion
  संजीवनी मराठे