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गुन-सागर गंभीर

गुन-सागर गंभीर दयामय
श्री गुरुदेव महान्‌!

सूर-ताल-लय-तान-गान के
किमयागार सुजान!

अनुशासन-पालनमें मन जो
उनका शैल-समान!

वही भरा है प्रेमभावसें
कोमल फूल-समान!