A Non-Profit Non-Commercial Public Service Initiative by Alka Vibhas   
कुणीतरी सांगा हो सजणा

रातिची झोप मज येइना
की दिस जाइना
जा जा जा
कुणीतरी सांगा हो सजणा !

लागली श्रावणझड दारी
जिवाला वाटे जडभारी
अशी मी राघुविण मैना
की झाली दैना
जा जा जा
कुणितरी सांगा हो सजणा !

एकली झुरते मी बाई
सुकली ग पाण्याविण जाई
वाटते पाहु मनमोहना
की मन राहिना
जा जा जा
कुणितरी सांगा हो सजणा !

 

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