A Non-Profit Non-Commercial Public Service Initiative by Alka Vibhas   
प्रणया नवरुचि देता

प्रणया नवरुचि देता । हा विरह रुचिर गमला ।
विरहपीडिता । तृषित मना ॥

मजसम मधुपा । तू गमसि कमला ॥
गीत - वसंत शांताराम देसाई
संगीत -
स्वर- गंगाधर लोंढे
नाटक - संगीत प्रेमसंन्यास
राग - भीमपलास
ताल-एकताल
चाल-देरेना
गीत प्रकार - नाट्यगीत

 

Print option will come back soon