सत्पात्र हा ललनाकपोल
सत्पात्र हा ललनाकपोल । अरसिक नर ।
वरि चढवि न नग बहमोल ॥
स्मित चतुर करित परिसुनी सुकाव्या ।
करि वर्णविकारिंच भाव खुला अबोल ॥
करुणहृदय शमवित नरपिपासा ।
वितरोनि सुधोपम चुंबन हर्षलोल ॥
वरि चढवि न नग बहमोल ॥
स्मित चतुर करित परिसुनी सुकाव्या ।
करि वर्णविकारिंच भाव खुला अबोल ॥
करुणहृदय शमवित नरपिपासा ।
वितरोनि सुधोपम चुंबन हर्षलोल ॥
| गीत | - | श्रीपाद कृष्ण कोल्हटकर |
| संगीत | - | वझेबुवा |
| स्वर | - | भार्गवराम आचरेकर |
| नाटक | - | वधूपरीक्षा |
| राग / आधार राग | - | देस |
| ताल | - | त्रिवट |
| गीत प्रकार | - | नाट्यसंगीत |
| कपोल | - | गाल. |
| परिसा | - | ऐकणे. |
| पिपासा | - | तहान. |
| लोल | - | चंचल / आसक्त. |
| वितरणे | - | देणे. |
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भार्गवराम आचरेकर