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पतितपावना भेट

पतितपावना । भेट नच पुन्हा ।
जीव आज सुना । माना ॥

निज कन्यका मज मानिलें ।
उतराई कैसे व्हावे । शतजन्‍म अपुरे माना ॥

 

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